वक़्त वक़्त की बात है,
एक वक़्त था कि लैंडलाइन फोन थे,
किसी से बात करने के लिए
घर या ऑफिस की जरुरत पड़ती थी।
आज वक़्त बेवक़्त भी कही से
किसी से भी बात कर सकते है।
रिश्ते दूर दूर हुआ करते थे
पर चिट्ठियां और एसटीडी काल
उन्हें पास ला दिया करते थे।
जो मजा उन कागज की चिट्ठियों में था
वो आज की ईमेल में कहाँ है?
जो घंटो इंतजार के बाद ट्रंकाल काल में था
वो आज के इंस्टेंट काल में कहाँ।
जब कही जाते थे तो सात दिन में
पोस्टकार्ड से पहुचने की खबर पहुचती थी
वो सात दिनों मे भरोसा होता था।
पर आज कही जाते है तो सात काल हो जाते है
इंतजार अब खबर बन गया है।
उस वक़्त दूरियों में
नजदीकियां बसती थी,
और आज हम नजदीक होकर भी
दूर हो गए है।
कहते है साइंस ने बहुत तरक्की की है
दुनिया को पास लादिया है
अगर इसे ही पास लाना कहते है
तो वो दूरियां ही अच्छी थी।
सात दिन लगते थे,
पर अपने, अपने लगते थे।

Risk

 

चला था सफर में सोचा कर की सुरक्षित हूँ ,

मेरी सुरक्षा कहा कहाँ खर्च हो गयी पता ही न चला।

रिस्क पहले दिन से ही मेरे साथ थी घूघट में,

आज घूघट उठा दिया रिस्क से

बना लिया उसे अपना,

तो रिस्क ही बनगई सुरक्षित हमसफ़र

क़तरा-क़तरा …

qatraqatra1

 

जब आँख खुली

मैं एक किरदार बन गया

इस दुनियां के रंगमंच का,

आये दिन रोल बदलते हैं

डायलॉग बदलते है,

कभी लड़ाई

तो कभी मनोरंजन,

रोना धोना भी

लगा रहता है.

आँखे जैसे एक

कैमरा हो गयी है;

जिसमें मैं

मुझी को देखता हूँ

इस नाटक में

रोज़ क़तरा-क़तरा

 

Sabki Bari

जाना तो सभी को है
फिर आने के लिये।
दिन भर गरमाया
सूरज भी जाता है,
चाँद को जो
आना होता है
सितारों के साथ।
सबकी बारी होती है,
आज मेरी थी;
कल तुम्हारी;
और फिर मेरी,
जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…

 

Vibrants

संभावनाओ के बीज
उगाते है हम,
integrity जमी मिलजाए
और commitment का पानी
तो आसमा हमारा होगा।
enrollment में possibility
दिखाते है हम,
लोगो को opportunity दिख जाये
तो हवाओं का रुख
बदल जायेगा।
सबकी काबिलियत पे
ताली बजाते है हम ,
acknowledgment की
लडिया बनाते है हम,
हर किसी में
लीडर जागते है हम
क़तरा -क़तरा

आँख खुली तो सबसे पहली मुलाकात
एक रंग से हुई
और तब से
ये मुलाकातों का  सिलसिला जारी है।
हम  आये थे एक स्वच्छ – साफ़ – श्वेत
चेहरा लिए मन का,
रंगों ने दे दिए हमें अलग-अलग रूप, पेहचान,
ये रंग हैं वक्त के, व्यवहार के, व्यक्तित्व के।
हम जब भी कहीं देखते है,
एक नया रंग दिखता है।
ये चहरे है रंगों के
ये रंग है जिंदगी के।


फोटो ही तो जो याद दिलाते है
गुज़रे लम्हे एक फिल्म की तरह .
सबकुछ कितना fast rewind हो जाता है
आँख बंद करो तो .
एक-एक करेक्टर बोलने लगता है
कुछ echo sound में आवाजें सुनाई  देने लगती हैं
कुछ गाने, कुछ संगीत .
फोटो जिन्दा हो जाता है ,
और जैसे ही आँख खुलती है
fast forward
हम आज में उसकी खुशबू ले रहे होते है
और ज़िन्दगी यू ही चलती रहती है
क़तरा-क़तरा

आखें पथरागयी है इंतजार मे
उन्होंने कहा था कल करूँगा.
ना कोई चिठ्ठी है, ना सन्देश
मुआ मोबाईल भी थक गया है
कहानिया सुन सुन के,
चेट पर हरी बत्ती जलती रहती है
चक्छु दोस होगया है मुझे
हरा, लाल दिखने लगा है

आज मन अंतर्मन की सुन रहा है
किसी ने कहा था ,
कल कभी नहीं आता
आज देख भी लिया,
कुछ कल के वादों की
वेटिंग भी ख़त्म हो गयी है
और ट्रेन जा चुकी है
कुछ का वजूद मिट गया है
और कुछ, कुछ ना कुछ की कगार पर है

मन करता है की
कैलाश पर चला जाऊ,
बर्फ की ठंडी चादर ओड़
एक कल बन जाऊ
जो कहता था
आज ही कर लो जो करना है
कल को किसने देखा है
जिंदगी आज में है क़तरा – क़तरा

जो रास्ते बड़े लगते थे
तय करने मे छोटे हो गए,
जो आसमा बड़ा लगता था सपनों केलिए
आज सपने आसमा से बड़े हो गए.

मै चला था सफ़र में सबके साथ,
पर अकेला था.
आज अकेला हूँ
पर साथ है सबका.

आजकल बहुत रोता हूँ मैं,
आंसुओ को हसना सिखा दिया है.
थम गया परिस्थितिओं  पे रोना अब
आज रोते रोते भी हसता हूँ मै.

कोई चले या न चले
मुझको तो चलना है,
रास्ता भी मै – मंजिल भी मै,
मुझको तो बस चलाना है.

आज मुझसे मेरी मुलाकात हो गयी.
आज मुझसे मेरी बात हो गयी,
सालों से न जाने कौन था मै
आज मुझसे मेरी शुरु आत  हो गयी.

चलता था तो पहले भी
पर चलता था घुटनों के बल,
पहली बार खड़ा हुआ हूँ
आज कल को कह दिया कल.

कहता था जो कल की कहानी
कल में खो गया वो,
आज की बात करो
आज अभी में  हूँ मै.

Dedicated to Landmark


नाम याद नहीं रहते
चेहरे बोलते है,
बोलती है उनकी परछाइयां ,
रोज़ कोई आता है
कोई चला जाता है,
ना जाने ये सिलसिला
कब से चालू है,
पर कोई अपनी
छाप छोड़ जाता है,
कोई याद रह जाता है,
दुनियां की इस भीड़ मे
क़तरा-क़तरा…

COPYRIGHT 2009, The blog author holds the copyright over all blog posts