एक बात अजब सी है रौशन ऐ जिंदगी में
ये चलती रफ़्ता रफ़्ता पर तेज़ सी दिखती है

आते है पड़ाव इतने पर रुकते कहाँ है हम
कुछ छूट सा जाता है हम जोड़ते रहते है
हर राह पे मुश्किल कुछ तनहा सी मिलती है
ये चलती रफ़्ता रफ़्ता पर तेज़ सी दिखती है

मोहताज़ है हम कितने इस वक्त के आईने में
हमको हम ही दिखाते है हम देखते रहते है
धुंधली सी कही इसमे उम्मीद सी खिलती है
ये चलती रफ़्ता रफ़्ता पर तेज़ सी दिखती है

खुशियों के ख्वाब से ही अँधेरा भी रौशन है
उम्मीद के बिछोने में सब जागते रहते है
ख्वाबों की एक दुनिया दिन मे भी तो सजती है
ये चलती रफ़्ता रफ़्ता पर तेज़ सी दिखती है

आज कई इमेल
लिखने के तरीको के
बारे में सोचा
कुछ लिखे भी

कुछ सोये हुए वादों को
जगाने के लिए लिखे,
तो कुछ नए वादों को
पाने के लिए लिखे ,

पूरा दिन इधर उधर की
ताक-झाक में गया,
लोगों के ब्लॉग खगाले
कुछो पर अपने निशाँन छोड़े.

इंतजार किया
अपने इनबाक्स में
किसी एक उम्मीद का

जवाब तो नही आया
हाँ इमेल ज़रूर
बाउंस हो कर आ गया
उनके पते से,
सो उम्मीद जारी है
एक नए पते केलिए
एक नए
अपोइन्टमेन्ट के लिए

आज मन ले गया कुछ नयी किताबों के बीच,
जहाँ नए सिद्धांतों के अम्बार लगे थे,
जो कह रहे थे नए ज़माने में सफल होने की तरकीबें .

एक पन्ना कह रहा था
बॉस  पर विश्वास मत करो
वह कभी आपको आगे नही पहुँचायेगा

एक पन्ना कह रहा था
अपने हुनर का ज्यादा प्रदर्शन मत करो
छोटे बड़े सबको जलन होती है

एक पन्ना कह रहा था
लोगों को अपने ऊपर निर्भर बनाओ,
दूसरों के दिलो दिमाग पर काम करो,
दोस्तों पर विश्वास कभी मत करो,
अपने दुश्मन को जड़ से उखाड़ फेको.

लगा जैसे ये सब तो मै देख चुका हूँ,
पिछ्ले  कुछ सालों में अपने आस-पास.

अब दिमाग चकरा गया ,
मेरे गुरुओं ने शिक्षा दी थी
चीजों को इतना आसान कर दो
कि कोई भी कह उठे
अरे यह तो मै भी कर लेता

किसी को मत काटो
बड़ा बनाना है तो
किसी लाइन के साथ बड़ी लाइन खीच दो

काम को सहज करो
अपना विचार दूसरों का बनादो,
लोगों को प्रोत्साहित करो.

अब असमंजस मै हूँ
किसे मानू इस गिरगिट की तरह
रंग बदलती दुनिया मे,
जहाँ  कमेटमेन्ट  नाम की
कोई चीज नही है
फ़िर वो कोई छोटे ओहदे वाला करे
या बड़े ओहदे वाला.

राजनीति क्या है
नीति के द्वारा राज करना या
राज करने के लिए अपनी नीति बनाना,
चाहे वो कैसी भी हो
नैतिक या अनैतिक
पता नही.

हाँ इतना ज़रूर पता है
की आज राजनीति का शाब्दिक अर्थ
सिर्फ़ राज रह गया है,
नीति का अर्थ
किसी भी तरीके से इसे हासिल करना है,

साम्प्रदायिकता फैले तो फैले
लोग मरते है तो मरे
वोट नही मरना चाहिए,
जो जिस मज़हब की दुहाई देता है
वो उसी का शोषण करता है,

“नेता” शब्द अब
उल्टा हो गया है “ताने”
ताने देना अपने विपक्षियोँ को,
और ताने खीचना वादों  की
मतदाताओं के सामने.

पहले  इस सब में
सेवा, समर्पण, सुशासन जैसी
भावना प्रधान होती थी,
पर सुना है आज
भावना लापता है
प्रधान जी के साथ….

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