फोटो ही तो जो याद दिलाते है
गुज़रे लम्हे एक फिल्म की तरह .
सबकुछ कितना fast rewind हो जाता है
आँख बंद करो तो .
एक-एक करेक्टर बोलने लगता है
कुछ echo sound में आवाजें सुनाई  देने लगती हैं
कुछ गाने, कुछ संगीत .
फोटो जिन्दा हो जाता है ,
और जैसे ही आँख खुलती है
fast forward
हम आज में उसकी खुशबू ले रहे होते है
और ज़िन्दगी यू ही चलती रहती है
क़तरा-क़तरा

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