चहरे पे चेहरा
लगा कर घूम रहा हूँ
मै खुद को खुद से
छिपाकर घूम रहा हूँ .
मुद्दत हो गयी देखे
अपना अक्स,
ये कौन है सामने
मै हूँ या है कोई
और शक्स…

7 Responses to “अक्स”

  1. Dimple Says:

    मै हूँ या है कोई
    और शक्स…
    Good lines, crisp and clear!
    It reminded me of AKS song “chehre pe chehra, chadta hai chehra, chehra badalta hai chehra hi chalta hai…”

  2. Umesh Batra Says:

    Main Zindagi Ka Raaj Chipata Chala Gaya….

  3. surender Says:

    यतीश भाई,
    छोटा पेकेट बड़ा धमाका वाली बात है जो आपने लिखा है!
    आफरीन….

  4. Amit Says:

    Another good one sir… now daily we get some good lines to read :)

  5. Urmi Says:

    वाह अद्भुत सुन्दर रचना! लाजवाब! इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई!

  6. neha Says:

    bahut sunder lines haa….भावो को अछे से दर्शाया हैं…aacha laga apka blog

  7. P. K. Jain Says:

    यह तो आश्चर्य ही है. एक कम्प्यूटर में माहिर व्यक्ति से कविता और वह भी सीधे सीधे दिल को छूने वाली. अनूठा प्रयोग शब्दों का, बधाई और ढेर सारी शुभकामनयें.

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