एक है जो ख़त्म हो रही है;
“जिंदगी”
एक है जो बड़ रही है;
“उम्र”
एक जो बन रहे है; बिगड़ रहे है;
“रिश्ते”
एक है जो चल रहा है;
“वक़्त”

जिंदगी, उम्र, रिश्ते, वक़्त,
सब ताने-बाने है।

वो जो एक है ;
वो हम है।
जो हमेशा
एक और अकेले ही
रुखसत होंगे।

3 Responses to “एक”

  1. समीर लाल Says:

    वाह! क्या बात कही है!!

    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    अनेक शुभकामनाएँ.

  2. Dimple Says:

    The bitter truth … portrayed very nicely!
    Good… Good… Good

  3. Umesh Batra Says:

    You have given a very big message of life in few lines… Good one… keep it up…

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