आज कोई ख्वाब टूटा है कही
कही न कहीं सबके ख्वाब टूटते है
पर मन का इकतारा
बजाता रहता है एक धुन
बार बार जुड़ने की.
ये धुन कभी बंद नहीं होती
हम ही इकतारे के
दिए की  तरह
मिल जाते है मिट्टी मे
पर ये तार ख्वाबो के
जुड़े रहते है कही न कही
आज हम से कल किसी और से …

2 Responses to “ख्वाब”

  1. समीर लाल Says:

    -बेहतरीन सजाया है उन भावों को रचना में..जुड़ाव महसूस हुआ. बधाई. :)

  2. Dimple Says:

    Wow…!!
    Brilliant way of portraying your feelings! I liked the picture… it was quite matchin to the title.

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