Nov 23
खैरियत जानने के लिए पहले
लिखते थे ख़त,
फिर दौर आया फ़ोन का
ट्रंकाल लगाया करते थे।
आज बात चीत करना सरल है
पर हम,
चैट मे online स्टेटस देख
तसल्ली दे लेते है मन को
की सब कुछ ठीक है।
कभी अजनबी सी कभी जानी पेहचानी सी, ज़िंदगी रोज़ मिलती है क़तरा-क़तरा…
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