नए साल का वचन
नए साल का वचन

ज़िंदगी तो ज़िंदगी है,
चलती रहती है अपनी ही गति से।
हम उसे मायने देते हैं,
बाँधते हैं
दिन, तारीख़ और सालों में।

उसमें रंग भरते हैं—
सुख और दुःख के।

रिश्ते बनते हैं, बिगड़ते हैं।
कभी सफलता मिलती है,
कभी असफलता मिलती है।

हम थकते नहीं,
बस चलते रहते हैं,
अपने कर्म करते रहते हैं।
और यह भूल जाते हैं—
कि हम कौन हैं?
कहाँ से आए हैं?
कहाँ जाना है?
क्या कमाना है?
और क्या साथ ले जाना है?

आओ, इस नए साल में
थोड़ा चिंतन कर लें,
इस बार अपने आप को जान लें।

रिटर्न टिकट लेकर ही हम पैदा हुए थे,
बस तारीख़ नहीं पता हमें—
कि वापसी कब हो जाएगी।

भगवान भी यहाँ सदा के लिए नहीं रुके,
और न हम यहाँ सदा के लिए हैं।
आओ, इस 25–26 की गिनती से
थोड़ा ऊपर उठ लें,
इस बार कुछ सच में नया कर लें।

आओ, खुद से फिर मिल लें—
जो दूसरों में बिखर गया है।
आओ, हम दूसरों के साथ
खुद को नया रच लें।

क्योंकि हम एक समाज हैं,
समाज में लोग हैं।
हम हैं तो लोग हैं,
और लोग हैं तो हम हैं।

आओ, एक-दूसरे में
कुछ विश्वास रख लें,
आओ, मिलकर
कुछ नया कर लें।

आओ, एक प्रण लें—
नए साल को
एक नया वचन दें।

– यतीष जैन

यंग पीपल फ़ोरम में जब बच्चों को मैंने
शेयर करते देखा,
मैं अपने बचपन में लौट गया —
ऐसे जी रहा था, जैसे फिर से वही पल हों।

ऐसा लग रहा था,
जैसे मैं अपनी ही रील देख रहा हूँ —
ख़ुद से अपने रैकेट चला कर
विसियस सर्कल को पी रहा हूँ। 🎯

आज उन्हें मौक़ा मिला —
अपना पास्ट छोड़ने का,
और ख़ुद को अपने लोगों से
इंटीग्रिटी के साथ जोड़ने का।

सोचो ज़रा…
अगर ऐसा हो जाए,
हर बच्चे को मिले ये स्पेस
तो ट्रांसफ़ॉर्म हो जाएगी
दुनिया… और सारा देश। 🌏

तो बैठे क्यों हो?
डिक्लेरेशन दो!
कोई अछूता नहीं रहेगा Young People Forum से —
क्योंकि Cause in Matter,
हम बनेंगे उनकी Transformation में! 🚀

Yatish jain
www.yatishjain.com

कभी हम भी आए थे
इस जगह ऐसे ही,
जैसे आज ये युवा आए हैं।
और बना था एक माहौल —

सब कुछ साझा करने का,
जो अंदर था, जो बाहर था।
आज फिर हमने देखा कि
हम कहानियों की दुनिया में जीते हैं।

कुछ भी हुआ,
तो बना डाला एक कहानी-संग्रह,
जिसमें माँ-बाप, रिश्तेदार,
दोस्त, भाई, बहन —

सब किरदार होते हैं।
और इस कहानी के रचयिता
हम ही होते हैं।

आज फिर हमने जाना कि
इन कहानियों का जीवन की घटनाओं से
कोई लेना-देना नहीं है।
सब हमारी ही कल्पना है,
और यही है हमारे दुःख
और अव्यवस्था का कारण।

आज हमने एक और शस्त्र फिर से पकड़ा —
रैकेट नहीं, रैकेट लॉन्चर,
जो हम ख़ुद ही हैं।
आज हम फिर एक ऐसे स्पेस में पहुँचे
जहाँ हम ख़ुद — ख़ुद से मिले,
जो कहीं खो गए थे।

आज हम फिर ट्रांसफ़ार्म हुए। 
अब हम लेखक तो हैं, पर
हमारी कहानियाँ पॉसिबिलिटी की हैं,
क्षमा की हैं,
नई संभावनाओं की हैं।

अब हम रैकेट तो चलाएँगे,
पर कमिटमेंट की रेस्पॉन्सिबिलिटी के साथ।
क्योंकि आज हमें शंकर मिले हैं,
जिन्होंने दिखाया —
तांडव इंटीग्रिटी का,
एम्प्टी और मीनिंगलेस दुनिया में
अनंत पॉसिबिलिटी के साथ।

Yatish jain
Professor Visual communication
www.yatishjain.com

अनेकान्तवाद की दृष्टि से हिंसा के मनोवैज्ञानिक रूप

मन-वचन की हिंसा को
लाइसेंस दे दिया अहिंसा का,
और हर हिंसा को बना लिया
विषय — ज्ञानमीमांसा का।

चिंतन करते हैं हिंसा पर,
जो हमने कभी की ही नहीं,
और जो बसती है मन में भीतर,
उसकी परतें जमी हुई कहीं।

पढ़कर पुस्तक, सुनकर लेक्चर,
क्या इसका दमन होगा?
हिंसा तो हमारी आदत है,
जैसे नशा — सिगरेट और शराब का।

अब इससे छुटकारा कहाँ,
कौन इसका डॉक्टर है?
जो भी इसका डॉक्टर है,
वो खुद इसका शिकार है।

अब मन-वचन की हिंसा
सारे समाज का भार है,
देखने में यह अदृश्य सही,
पर भीतर बड़ा प्रहार है।

मन में बसती है गहराई तक,
और करती है गुप्त प्रहार —
हिंसा अब कोई घटना नहीं,
यह बन चुकी है हमारा विचार।

*यतीष जैन* 
रिसर्च स्कॉलर 
प्रोफेसर विसुअल कम्युनिकेशन
9555551144
www.yatishjain.com 

*ANEKANT*
Social Empowerment and Research Foundation 
༺꧁🙏🏻꧂༻

मैंने ज़िंदगी को
लाइब्रेरी की तरह पढ़ा है।
मेरा रिसर्च पेपर काग़ज़ों पर नहीं—
किताबों में तो अतीत दफ़्न है।

मैं आज की बात करता हूँ,
लोग मुझे एकान्त से देखते हैं,
और मैं—
अनेकान्त में बसता हूँ।


यतीष जैन
रिसर्च स्कॉलर 
प्रोफेसर विसुअल कम्युनिकेशन
9555551144
www.yatishjain.com 

ANEKANT
Social Empowerment and Research Foundation 

मैं पानी हूँ,
पाँच तत्वों में एक कहानी हूँ।
मैं बादलों में, मैं नदियों में,
मैं धरती के नीचे छुपा पानी हूँ।

मैं ही बहता हूँ आप की नस-नस में,
शरीर में 70% तक बसता हूँ।
पृथ्वी की गोद में भी
71% बनके चमकता हूँ।

मैं ज़हर भी बनता हूँ,
अगर तुम मुझे गंदा कर दो।
मैं अमृत भी बनता हूँ,
अगर तुम मुझे समझ कर बरतो।

मैं सुनता हूँ, मैं समझता हूँ,
मैं सिर्फ़ बहता नहीं—कहता भी हूँ।
मैं सेहत लाता हूँ…
पर बीमारियाँ भी साथ में लाता हूँ—

हैजा, टाइफाइड, दस्त, हेपेटाइटिस,
कैंसर तक को न्यौता दे जाता हूँ।
क्यों?
क्योंकि तुमने मुझे जाने बिना अपनाया!

तय तुम करोगे—
मैं जीवन बनूँ… या विनाश?
मैं दोस्त बनूँ… या बीमारी की तलाश?

जो मेरी कद्र करता है,
मैं उसे तंदुरुस्ती देता हूँ।
जो मुझे नजरअंदाज़ करता है,
मैं उसकी ज़िंदगी से खेल जाता हूँ।

🌱 अब समय है जागने का।
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क्योंकि अधिकतर RO और फ़िल्टर—सिर्फ़ नाम के हैं।
अब लाओ स्मार्ट समाधान — सही ज्ञान के साथ।

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ANEKANT
Social Empowerment and Research Foundation
9555551144 

“जल है तो कल है — लेकिन साफ़ जल है तो स्वस्थ कल है।”

आइना

सामने मेरे वो है जो दिखता मेरे जैसा है,
मेरी आदतों में भी वो मेरे जैसा है.

वो हसीन है उम्मीदों से घिरा हुआ
सपनो से है उसका दिल भरा हुआ,
मै उसकी हर बात का क़ायल सा हो गया हूँ,
मै आज उसका आइना सा हो गया हूँ.

उसकी उड़ान आसमानो से परे है
उसके ख़ाब बदलो से घिरे है ,
मै उसके साथ हवा में खो गया हूँ,
मै आज उसका आइना सा हो गया हूँ .

उसकी आँखों में कई मंज़िले झलकती है
उसकी माथे की लाइनें रास्ते सी दिखती है,
मै उसके सफ़र में साथी सा हो गया हूँ
मै आज उसका आइना सा हो गया हूँ .

वो जहां भी जाता है वहाँ रास्ता बन जाता है
वो जहां भी रुकता है वो ही मुक़ाम हो जाता है ,
मै उसका मील का पत्थर सा हो गया हूँ,
मै आज उसका आइना सा हो गया हूँ .

वो जो बोले तो महफ़िल में समा बंध जाता है
उसके होंठों से जो झरे वो अम्रत हो जाता है,
मै उसकी वाणी का सानी सा हो गया हूँ ,
मै आज उसका आइना सा हो गया हूँ.

www.yatishjain.com
धन्यवाद भगवान, धन्यवाद कायनात

मै हूँ क्रतज्ञ इस बेला का जिससे दिन की शुरुआत हुई,
मेरे जीवन में ख़ुशियो की बहुतायता की बरसात हुई।

मैं हूँ कृतज्ञ इस श्रस्टी का जिसने मुझे माता पिता दिए ,
मेरी इक्छाओँ की पूर्ती के लिए उन्होंने जीवनभर काम किये।

मैं हूँ कृतज्ञ उन गुरुओ का जिन्होंने हमको ज्ञान दिया,
उन सभी शिक्छण संस्थानों का जिनपर हमने अभिमान किया.

मैं हूँ कृतज्ञ भाई बहनों का जिन्होंने इतना प्यार दिया,
जीवन के सुख दुःख में मेरे हरदम मेरा साथ दिया।

मैं हूँ कृतज्ञ अपनी पत्नी का जिससे मेरी परिपूर्णता है ,
सुख दुःख में उसने साथ दिया जिसमे मेरी सम्पूर्णता है।

मैं हूँ कृतज्ञ अपने बच्चो का जिसने हमको सौभाग्य दिया,
अपनी ममता पर नाज करे ऐसा हमको मान दिया। 

मैं हूँ कृतज्ञ उन दोस्तों का जो हर हरदम साथ निभाते 
हर मुश्किल हर विपदा में बिन बुलाये आ जाते है। 

मैं हूँ कृतज्ञ उस समाज का जो हमको आश्रय देता है ,
अपने होने के वजूद से सारी चिंता हर लेता है।

मैं हूँ कृतज्ञ इस धरती का सूरज चंदा इस अम्बर का,
जिनके होने से प्रकृति में ऋतुओ का संचार हुआ।

मैं हूँ कृतज्ञ किसानो का ग्वालों का जो हमको भोजन देते है,
उन ट्रांसपोटरों का दुकानदारों का जिनसे हम ये सब लेते है।

मैं हूँ कृतज्ञ डॉक्टरों का स्वस्थ कर्मचारियों का हॉस्पिटल है जो हमको सेवा देते है,
उन दवा कंपनियों का, उपकरणों का जो हरदम तत्पर रहते है।

मैं हूँ कृतज्ञ पुलिस का सेना का सिक्योरिटी सिस्टम का जो हमको सुरक्छा देते है,
उनकी दिन रात की मेहनत से हम चैन की नींद सोते है।

मैं हूँ कृतज्ञ रिक्शा बस ट्रेन जहाजों का जो यातायात सुगम बनाते है
जिनकी दिनरात की तत्परता से हम कही भी आते जाते है।

मैं हूँ कृतज्ञ उन जाने अनजाने श्रोतो का जिससे मैं खुशहाल हुआ,
जिसने मेरी सम्पन्नता मैं अपना हर योगदान दिया।

मैं हूँ कृतज्ञ इस ग्रुप के हर मेंबर है जो सबको दुआए देता है,
हर परिस्थिति में प्रेयर करके सबके दुःख हर लेता है।

मैं हूँ कृतज्ञ मोनिका जी का जो हरदम राह दिखाती है,
मुझमेँ हीँ मेरी शक्ति का हर पल ध्यान कराती है।

मैं हूँ कृतज्ञ अपनी छमा का जो सबको छमा करता है,
और है विनती सबसे हाथ जोड़ की वो भी मुझको छमा करें।

धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद
धन्यवाद भगवान, धन्यवाद कायनात 

जादू था जीवन में 
पर भूल गए थे,
रोमांच भी था 
कहीं खो गया था.
फिर मन के किसी कोने से 
एक आवाज़ आयी,
थैंक यू थैंक यू थैंक यू कहती 
सामने स्क्रीन पर मोनिका आयी
साथ में आशाओं का जादू लायी। 

सबसे पहले मुझसे 
मेरी मुलाकात हो गयी,
जो धूल चढ़ी थी शीशे पर 
थैंक यू की बारिश से धुल गयी। 

दूसरा सपनों के बादल 
मडराने लगे 
कुछ जादू के रूप में 
सामने आने लगे। 

तीसरा पंखों में उड़ान की 
पावर आ गयी ,
कुछ ऐसा स्प्रिंकल किया 
इस जर्नी ने 
मोनिका सब पर छा गयी। 
Thank you Thank you Thank you

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खैरियत जानने के लिए पहले
लिखते थे ख़त,
फिर दौर आया फ़ोन का
ट्रंकाल लगाया करते थे।
आज बात चीत करना सरल है
पर हम,
चैट मे online स्टेटस देख
तसल्ली दे लेते है मन को
की सब कुछ ठीक है।

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