Dr Kailash Kumar Mishra

कविता के तुम भाई हो
लेखों के तुम साँई हो,
गर खड़े हो गए मंच पर
तो समारोह के नाई हो।
वाद विवाद की दाई हो
ज्ञान का सागर हो
कला की गागर हो।

नाम तुम्हारा है कैलाश
वाणी मैं है मिश्री का वास,
एक बार जब मिले किसी से
बना देते वो लम्हा खास।

One Response to “गुरु गान | Guru Gaan”

  1. Kailash Kumar Mishra Says:

    बहुत बहुत आभार

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