खुशियों का
कोई दिन नही होता,
जब चाहे मनाओ,
पर फुरसत कहाँ है
इस दौड़ धुप में,
तभी तो उपरवाले ने
त्यौहार बनाये है
हर मौसम में,
होली, दिवाली, ईद
और अब लो
आ गया क्रिसमस.
Merry Christmas
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त्यौहार,
क्रिसमस,
यतीष जैन
आयीं है उम्मीदे
आया है वक्त फिर दोहराने,
आयी है दस्तक इन्साफ की
और
आयीं है रहें देखने
अपने चाहने वालों की
इन्साफ की डगर पे
जीत-हार
या
उपहार
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मै किसी नई डायरी मे नहीं लिखता था
डर होता था ख़राब हो जायेगी.
फिर कॉलेज मै एक दोस्त मिला,
उसने एक डायरी दी
और मेरी चलपड़ी लिखने की।
जब तक साथ था हर साल एक डायरी देता था,
फिर नजाने क्या हुआ
हम बिछड़ गए ।
सुना है आज वो PHD हो चुका है
डॉक्टर कहलाने लगा है,
पेंटिंग मै या आर्ट हिस्ट्री मै
मुझे ये भी पता नही,
विदेश भी पढ़के आया है
और यही कही दिल्ली मै रहता है।
आज मेरी फिर चल पड़ी है लिखने की।
आज मै ब्लोग पे लिख रहा हूँ,
पर महसूस करता हूँ
ये पन्ने उसी डायरी के है ।
दोस्तो कही मिले
तो पता देना उसे मेरा,
नाम है उसका
“ऋषी”
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दोस्त,
यतीष
आजादी ढूड रहा था शब्दों मै ,
कि एक अजनबी दोस्त ने रौशनी दी ,
अपने बच्चों कि हँसी मै है आजादी ।
शुक्रिया …
बहुत कुछ मिलगया जो मेरे पास ही था ।