Word Creates World

Life is life—
it keeps moving at its own pace.
We give it meaning,
bind it
into days, dates, and years.

We fill it with colors—
of joy and sorrow.

Relationships are formed and broken.
Sometimes success arrives,
sometimes failure does.

We do not really stop;
we simply keep moving,
keep performing our actions.
And somewhere along the way, we forget—
Who are we?
Where have we come from?
Where are we going?
What are we trying to earn?
And what will we finally carry with us?

Come, in this New Year,
let us pause for reflection.
This time, let us truly know ourselves.

We were born with a return ticket,
only the date is unknown—
the day of our departure.

Even God did not stay here forever,
and neither are we meant to.
Come, let us rise above
the counting of 25–26,
and do something genuinely new this time.

Come, let us meet ourselves again—
the self scattered among others.
Come, together with others,
let us recreate ourselves anew.

Because we are a society,
and society is made of people.
If we exist, people exist;
if people exist, we exist.

Come, let us place something
of ourselves in one another.
Come, together, let us create something new.
Come, let us take a vow—
and offer the New Year
a new promise.

Yatish Jain

नए साल का वचन
नए साल का वचन

ज़िंदगी तो ज़िंदगी है,
चलती रहती है अपनी ही गति से।
हम उसे मायने देते हैं,
बाँधते हैं
दिन, तारीख़ और सालों में।

उसमें रंग भरते हैं—
सुख और दुःख के।

रिश्ते बनते हैं, बिगड़ते हैं।
कभी सफलता मिलती है,
कभी असफलता मिलती है।

हम थकते नहीं,
बस चलते रहते हैं,
अपने कर्म करते रहते हैं।
और यह भूल जाते हैं—
कि हम कौन हैं?
कहाँ से आए हैं?
कहाँ जाना है?
क्या कमाना है?
और क्या साथ ले जाना है?

आओ, इस नए साल में
थोड़ा चिंतन कर लें,
इस बार अपने आप को जान लें।

रिटर्न टिकट लेकर ही हम पैदा हुए थे,
बस तारीख़ नहीं पता हमें—
कि वापसी कब हो जाएगी।

भगवान भी यहाँ सदा के लिए नहीं रुके,
और न हम यहाँ सदा के लिए हैं।
आओ, इस 25–26 की गिनती से
थोड़ा ऊपर उठ लें,
इस बार कुछ सच में नया कर लें।

आओ, खुद से फिर मिल लें—
जो दूसरों में बिखर गया है।
आओ, हम दूसरों के साथ
खुद को नया रच लें।

क्योंकि हम एक समाज हैं,
समाज में लोग हैं।
हम हैं तो लोग हैं,
और लोग हैं तो हम हैं।

आओ, एक-दूसरे में
कुछ विश्वास रख लें,
आओ, मिलकर
कुछ नया कर लें।

आओ, एक प्रण लें—
नए साल को
एक नया वचन दें।

– यतीष जैन

यंग पीपल फ़ोरम में जब बच्चों को मैंने
शेयर करते देखा,
मैं अपने बचपन में लौट गया —
ऐसे जी रहा था, जैसे फिर से वही पल हों।

ऐसा लग रहा था,
जैसे मैं अपनी ही रील देख रहा हूँ —
ख़ुद से अपने रैकेट चला कर
विसियस सर्कल को पी रहा हूँ। 🎯

आज उन्हें मौक़ा मिला —
अपना पास्ट छोड़ने का,
और ख़ुद को अपने लोगों से
इंटीग्रिटी के साथ जोड़ने का।

सोचो ज़रा…
अगर ऐसा हो जाए,
हर बच्चे को मिले ये स्पेस
तो ट्रांसफ़ॉर्म हो जाएगी
दुनिया… और सारा देश। 🌏

तो बैठे क्यों हो?
डिक्लेरेशन दो!
कोई अछूता नहीं रहेगा Young People Forum से —
क्योंकि Cause in Matter,
हम बनेंगे उनकी Transformation में! 🚀

Yatish jain
www.yatishjain.com

कभी हम भी आए थे
इस जगह ऐसे ही,
जैसे आज ये युवा आए हैं।
और बना था एक माहौल —

सब कुछ साझा करने का,
जो अंदर था, जो बाहर था।
आज फिर हमने देखा कि
हम कहानियों की दुनिया में जीते हैं।

कुछ भी हुआ,
तो बना डाला एक कहानी-संग्रह,
जिसमें माँ-बाप, रिश्तेदार,
दोस्त, भाई, बहन —

सब किरदार होते हैं।
और इस कहानी के रचयिता
हम ही होते हैं।

आज फिर हमने जाना कि
इन कहानियों का जीवन की घटनाओं से
कोई लेना-देना नहीं है।
सब हमारी ही कल्पना है,
और यही है हमारे दुःख
और अव्यवस्था का कारण।

आज हमने एक और शस्त्र फिर से पकड़ा —
रैकेट नहीं, रैकेट लॉन्चर,
जो हम ख़ुद ही हैं।
आज हम फिर एक ऐसे स्पेस में पहुँचे
जहाँ हम ख़ुद — ख़ुद से मिले,
जो कहीं खो गए थे।

आज हम फिर ट्रांसफ़ार्म हुए। 
अब हम लेखक तो हैं, पर
हमारी कहानियाँ पॉसिबिलिटी की हैं,
क्षमा की हैं,
नई संभावनाओं की हैं।

अब हम रैकेट तो चलाएँगे,
पर कमिटमेंट की रेस्पॉन्सिबिलिटी के साथ।
क्योंकि आज हमें शंकर मिले हैं,
जिन्होंने दिखाया —
तांडव इंटीग्रिटी का,
एम्प्टी और मीनिंगलेस दुनिया में
अनंत पॉसिबिलिटी के साथ।

Yatish jain
Professor Visual communication
www.yatishjain.com

अनेकान्तवाद की दृष्टि से हिंसा के मनोवैज्ञानिक रूप

मन-वचन की हिंसा को
लाइसेंस दे दिया अहिंसा का,
और हर हिंसा को बना लिया
विषय — ज्ञानमीमांसा का।

चिंतन करते हैं हिंसा पर,
जो हमने कभी की ही नहीं,
और जो बसती है मन में भीतर,
उसकी परतें जमी हुई कहीं।

पढ़कर पुस्तक, सुनकर लेक्चर,
क्या इसका दमन होगा?
हिंसा तो हमारी आदत है,
जैसे नशा — सिगरेट और शराब का।

अब इससे छुटकारा कहाँ,
कौन इसका डॉक्टर है?
जो भी इसका डॉक्टर है,
वो खुद इसका शिकार है।

अब मन-वचन की हिंसा
सारे समाज का भार है,
देखने में यह अदृश्य सही,
पर भीतर बड़ा प्रहार है।

मन में बसती है गहराई तक,
और करती है गुप्त प्रहार —
हिंसा अब कोई घटना नहीं,
यह बन चुकी है हमारा विचार।

*यतीष जैन* 
रिसर्च स्कॉलर 
प्रोफेसर विसुअल कम्युनिकेशन
9555551144
www.yatishjain.com 

*ANEKANT*
Social Empowerment and Research Foundation 
༺꧁🙏🏻꧂༻

मैंने ज़िंदगी को
लाइब्रेरी की तरह पढ़ा है।
मेरा रिसर्च पेपर काग़ज़ों पर नहीं—
किताबों में तो अतीत दफ़्न है।

मैं आज की बात करता हूँ,
लोग मुझे एकान्त से देखते हैं,
और मैं—
अनेकान्त में बसता हूँ।


यतीष जैन
रिसर्च स्कॉलर 
प्रोफेसर विसुअल कम्युनिकेशन
9555551144
www.yatishjain.com 

ANEKANT
Social Empowerment and Research Foundation 

मैं पानी हूँ,
पाँच तत्वों में एक कहानी हूँ।
मैं बादलों में, मैं नदियों में,
मैं धरती के नीचे छुपा पानी हूँ।

मैं ही बहता हूँ आप की नस-नस में,
शरीर में 70% तक बसता हूँ।
पृथ्वी की गोद में भी
71% बनके चमकता हूँ।

मैं ज़हर भी बनता हूँ,
अगर तुम मुझे गंदा कर दो।
मैं अमृत भी बनता हूँ,
अगर तुम मुझे समझ कर बरतो।

मैं सुनता हूँ, मैं समझता हूँ,
मैं सिर्फ़ बहता नहीं—कहता भी हूँ।
मैं सेहत लाता हूँ…
पर बीमारियाँ भी साथ में लाता हूँ—

हैजा, टाइफाइड, दस्त, हेपेटाइटिस,
कैंसर तक को न्यौता दे जाता हूँ।
क्यों?
क्योंकि तुमने मुझे जाने बिना अपनाया!

तय तुम करोगे—
मैं जीवन बनूँ… या विनाश?
मैं दोस्त बनूँ… या बीमारी की तलाश?

जो मेरी कद्र करता है,
मैं उसे तंदुरुस्ती देता हूँ।
जो मुझे नजरअंदाज़ करता है,
मैं उसकी ज़िंदगी से खेल जाता हूँ।

🌱 अब समय है जागने का।
🔍 पता करो — तुम्हारा पानी कैसा है?
🧪 सीखो मुफ्त में घर पर पानी की जाँच करना।
क्योंकि अधिकतर RO और फ़िल्टर—सिर्फ़ नाम के हैं।
अब लाओ स्मार्ट समाधान — सही ज्ञान के साथ।

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ANEKANT
Social Empowerment and Research Foundation
9555551144 

“जल है तो कल है — लेकिन साफ़ जल है तो स्वस्थ कल है।”

हे कार्यकर्ता तुम ज्ञान गुन सागर, तुमरे काज से तिहुँ लोक उजागर। 
नेता के तुम सन्देश वाहक, जनता का कोई तुम पर है हक़। 
तुम हो वीर बिक्रम बजरंगी, सुमति निवार कुमति के संगी। 
विद्यावान गुनी अति चातुर, नेता काज करिबे को आतुर। 

नेता चरित्र सुनिबे को रसिया, MLA सांसद मिनिस्टर मनबसिया। 
वोट मांग तुम इलेक्शन जितवा, बदले में तुम कछु नहीं पावा।  
चाटुकार आगे निकल जावा, सच्चा कार्यकर्त्ता वही रह जावा। 
भीम रूप धरि विपक्ष सँहारे, नेता जी  के काज सवाँरे। 

लाय सजीवन पार्टी बचाये, नेताजी हरषि उर लाए। 
नेता कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई।
तुम उपकार व्यपारियन कीन्हा, नेता मिलाय राज पद दीन्हा। 
तुम्हरो मंत्र कॉरपोरेट माना, साम्राज्य बनाया सब जग जाना।
 
नेता राज छुपावन माहिर, कबहुँ न कियो किसी पर जाहिर। 
दुर्गम काज नेतन के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते। 
नेता दुआरे तुम रखवारे, होत ना आज्ञा बिनु पैसारे। 
सब नेता सुख लहैं तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना।

आपन तेज सम्हारो आपै, राजनीती हाँक तै कापै। 
विपक्ष-पक्ष  निकट नहि आवै, नेता संग जब तुम हो जावे। 
नासै रोग हरे सब नेतन पीरा, जपत निरंतर तुम हनुमत बीरा। 
संकट तै नेतन को तुमहि  छुडावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै। 

फिर भी ऊपर नेता राजा, तिनके काज सकल तुम साजा। 
और मनोरथ जो नेता लावै, सोई अमित जीवन फल पावै। 
चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा। 
जनता के भी तुम रखवारे, नेता संग तुम काज सवारे।

लोक रसायन तुम्हरे पासा, फिर भी नेतन के तुम दासा। 
तुम्हरे काम जनता को भावे, फिर भी नेता तुम्हे दूर भगावे। 
अंतकाल पार्टी को याद आती, तुम्हारी कृपा से चुनाव जीत जाती। 
संकट कटै मिटै सब नेतन की पीरा, जो सुमिरै तुमरा नाम बलबीरा। 

जामवंत जब कथा सुनाई, तब हनुमंत जागे शक्ति आयी।  
तुम भी हो हनुमंत सरीके, जागो अब कहा पड़े हो नेतन की पी के। 
जनता की तो तुम ताकत हो, तुम नेता पीछे भागत हो।  
जनता से संवाद तुम्हारा, फिर भी नेता तुम्हे दुत्कारा। 

लोकतंत्र के तुम रखवारे, जनता संग मिलजाओ प्यारे। 
कूटनीति तुम भी अपनाओ, आओ अब एक KOOTWORLD बनाओ। 
तुम जनता के मन को भावे, फिर नेता तुम्हारे पीछे आवे। 
अपनी छवी बिखेरो भारी, तुम हो भविष्य के नेता भावी। 

दोहा 
सब के तुम संकट हरो, अब कार्यकर्त्ता से आगे बड़ो।
जनता तुम्हारे साथ है, तुम अब खुद नेता बनो। 

किसी भी पार्टी के कार्यकर्त्ता को यह लगता है की पार्टी
कार्यकर्ताओं का शोषण करती है और काम
निकलने के बाद उनका ध्यान नहीं रखती है,
वो कार्यकर्त्ता इस चालीसे को पढ़कर हमसे
संपर्क कर सकते है। और अपने स्वाभिमान
की रक्षा कैसे करनी है फ्री में जान सकते है।

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कहाँ है स्वतंत्र हम आज रो रही है भारत माता,
अपने ही लोगों का खुले आम क़त्ल हो जाता।
हिंदू सनातन कहते हो कहाँ के तुम हिंदू हो,
जो हो रहा अपनों के साथ उसके केंद्र बिंदु हो ।

सबका खून खौलता है,
तुम्हारा पानी हो जाता है ।
तुम्हारे सामने तुम्हारे भाई का,
सीना छलनी हो जाता है।

आकर मोहल्ले में तुम्हारे,
कोई अधिकार छीनता है।
तुममें ही है ग़द्दार,
आसानी से बीनता है ।

क्या करोगे झंडा उठाके,
डंडा तुममें पड़ चुका है।
अयोध्या भी चली गई,
अब क्या तुम्हारे पास बचा है ।

कहाँ हो स्वतंत्र तुम,
तुमसे वोट दिया नहीं जाता है ।
इसी लिये बंदर आके,
तुम्हारी रोटी खाता है ।

स्वतंत्रता स्वतंत्रता करके तुम,
अपने नक़्शे पर शरणार्थी बन जाओगे।
अगर आज तुम सब,
वोट देने की क़सम नहीं खाओगे।

आज़ादी का जश्न तभी सफल हो पाएगा,
100% वोट देकर लोकतंत्र जब आएगा।

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वसुधैव कुटुंबकम तुम कहते हो और किस कुटुंब में रहते हो,
अपने घर में साप पाल के दूध पिलाते रहते हो।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई तुम तो एक मानते हो,
हिंदू कितना पिसता है पड़ोस के देश में क्या तुम जानते हो ।

तुमने सबको मान दिया अपने घर स्थान दिया,
पर पड़ोसियों ने तुम्हारे भाइयों के साथ क्या किया।
उनका खून खौलता है तुम्हारा पानी हो जाता है,
जब कभी बंगला देश पाकिस्तान में अपनों घर जलाया जाता है।

उनकी राजनीति में सिर्फ़ उनकी जात को स्थान है,
हमारी राजनीतिक में हम ही उनके दलाल है।
उनके ऊपर यहां कुछ हो तो राहुल अखिलेश चिल्लाते है,
और वहाँ कुछ हो हम पर ये पहले बिल में छुप जाते है।

ममता दीदी की ममता भी घुसपैठियों पर बरसती है,
अपने देश की जनता अपने हक़ को तरसती है।
लालू के आलुओं ने हमेशा चुप्पी साधी है,
जब जब बंगला देश पाकिस्तान में हमारी हुई बर्बादी है।

केजरी की क्या कहे अब मोहम्मद केजीरिद्दीन बनना बाक़ी है,
मंदिरों को नहीं देता अनुदान पर वहाँ ख़ैरातों की झांकी है।
टैक्स भरे कोई और पलता कोई और है,
सनातनियों के खून में अब नहीं रहा कोई जोर है।

तुमरी हरकत देख के राम ने भी तुम्हारा छोड़ा हाथ है,
बजरंगबली भी जाएँगे और कृष्ण भी नहीं रहेंगे साथ है।
कब जागोगे जब तुम अपने नक़्शे पर तुम शरणार्थी बन जाओगे,
अगर आज तुम परदेश में अपनों के काम ना आओगे।

नेता तो अपने देश में अपनी रोटी सेकते है,
जब ज़रूरत होती है उनकी,
सिर्फ़ जुमले फेकते है ।

हम है परतंत्र नेता बन गये है आका हमारे,
लाना होगा अपने में से किसी को जो काम सवारे।
जो करे धर्म की रक्षा और देश निर्माण हमारा,
तभी होगा असली स्वतंत्रता दिवस हमारा ।

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